गरीब किसान

एक गांव में एक गरीब किसान था जिनके पास थोड़ा ही खेत आपने खेती करने का उसी से अपना जिंदगी गुजार रहा था किसी ना किसी तरह यह बात है जब सभी लोग अपने खेतों में फसल लगा रहे थे तब उस किसान के पास कुछ भी पैसे बचा नहीं था सबसे पीछे भी हो गया मगर उसके पास कुछ भी बीच को खरीद कर अपने खेतों में लगा सके तभी उसको पता चलता है कि कोई पैसा उधार पर देता है तभी वह गरीब किसान उसके पास पैसे पैसे के लिए जाता है और बोलता है मेरे को कुछ पैसा उधार दे दे दो और पैसे देने वाले ने उनको कहा चलो ठीक है मगर ब्याज भी लगेगा 5% ब्याज लगेगा और किसान तभी सोच में कुछ भी नहीं था क्योंकि उन्हें बीज लगाना था अपने खेतों में और ठीक बोल कर पैसे उधार पर ले लेते हैं और तब्बू अपने खेतों में बीज खरीद कर लगा देते हैं 2 महीने बीतने के बाद सभी में दाने उन्हें आ जाते हैं फसल में मगर अभी तक फसल पक्का नहीं है तभी आंधी आ कर उनके साडे फसल को बर्बाद कर देते जिनके कारण सारा फसल उनका बर्बाद हो जाता है ।

थोड़ा बहुत बचा भी था जो वह टिंडे की हमले से सारा खत्म हो गए यहां तक किसान क्या करेगा किसान बहुत दुखी हो गया क्यों दुखी हो गया क्योंकि उनका फसल भी बर्बाद हो कि हम के खाने के पास भी पैसे नहीं है अब और उधार जो लिया है उसका ब्याज भी देना यार सारा पैसा लौटाना भी है अब वह कैसे दे पाएगा पैसा किसान सोच रहा था यह सब बात की उसके पास ही उसकी पत्नी आ जाती है और उसकी पत्नी इसको समझाता है क्या हो गया आपको कैसे पैसा देंगे और खाएंगे क्या घर में एक भी खाने का दाना भी नहीं है।
उसकी पत्नी है सब बात कर वहां से चली जाती है तभी किसान सोचता है कि अब मैं क्या करूं वह सोचता है कि मैं आत्महत्या कर लूंगा फिर सोचता है कि बच्चों वाली इनका क्या होगा अगर मैं मर गया तो तभी उसकी बेटी स्कूल से आती है पढ़कर ।
उसकी बेटी कर मुख पर खुशी देखकर उसका मरने का मन त्याग देता तभी फिर किसान अपने खेत की तरफ जाता है फिर से खेत को उसी तरफ से देखता है तो पूरा खराब पड़ा है कुछ भी नहीं बचा है खेतों में किसान के फिर मैं वही बात आने लगता है कि मैं अब आदत मैं आत्महत्या कर लूंगा तभी किसान वहां से अपने घर की तरफ लौट जाता है लौटते वक्त उसके रास्ते में सभी दोस्त मिलते हैं बोलते हैं दोस्त यह क्या हो गया सभी तुम्हारे खेत में टिंडे खा गया और आंधी में गिर के खत्म हो गए सारे फसल और तभी वहां से ब्याज वाला आता है और बोलता है मेरे पैसे वापस करो और उसने किसान के जवाब में कुछ भी नहीं होता है तभी उसकी पत्नी कहते मैं कल दे दूंगी पैसा पत्नी भी सोच रही है कि मैं पैसा स्कोप कहां से दूं वह भी थोड़ी मोड़ी काम करते थे बगल वाले घरों में जाकर बर्तन मांज कर कुछ पैसे इकट्ठा करते थे।
पत्नी के मन में भी यही करा क्या अब तो कुछ भी नहीं हो सकता अब हम सभी को मरना ही ठीक रहेगा और पत्नी ने एक कहीं से आधा केजी चावल लाया चावल बनाया पहले इसमें थोड़ी सी जहर दे दिया जिनको खाने से सभी मर जाएंगे और वह चावल पक गया और सभी को परोस दिया और गरीब आदमी को भी दे दिया और अपनी बेटी को भी दी और अपने आप को भी खा लिया और सभी वहीं पर खा कर मर गए।

नोट

तो बस आज की कहानी में इतने ही दोस्तों क्या करेगा हमारे भारत में ना सिर्फ गरीब किसान ही आत्महत्या करते हैं कभी किसी को सुना है क्या

मेरा नाम YUGESH राजा है ।
मैं इस वेबसाइट के माध्यम से आप सभी को बीते हुए कल के बारे में बताता हूं थोड़ी सी जो सच्चाई होती है मैं उस चीज को यहां पर आप सभी को बता देता हूं

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